ब्रह्माणी देवी मंदिर पर भक्तो का आवागमन शुरू, निरिक्षण करने पहुंची जसवंतनगर की उपजिलाधिकारी नम्रता सिंह

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जसवंतनग – बलरई थाना क्षेत्र के अंतर्गत ब्रह्माणी देवी मंदिर स्थित है जहां नवरात्रि के समय मातारानी के भक्तों व् श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है माता के दर्शन करने आये भक्तो को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े इसे देखते हुए जसवन्तनगर की उपजिलाधिकारी नम्रता सिंह ने मौके का जायजा लेते हुए माता ब्रह्माणी के दर्शन किये साथ मेले की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए

पुजारी व मेला के अध्यक्ष अमरीश मिश्रा से मेले का इतिहास जाना मेले की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओ के दर्शन करने तक मध्य नजर रखते हुए सुरक्षा के निर्देश दिए बता दे आज का मौसम वरसात की फुहारों के साथ हल्की धूप नजर आ रही है श्रद्धालु डीजे व् अन्य प्रकार के ढोल नगाड़े की धुन पर थिरकते हुए झंडा चढ़ाने के लिए माता के दरवार में आते है श्रद्धालुओ का मानना है कि माँ ब्रह्माणी देवी पर झंडा चढ़ाने से उनकी मन्नते पूरी होती हैं यही कारण है कि लोग अपनी मनमांगी मुरादें पूरी करने के लिए यहाँ झंडा चढाने आते है

ब्रह्माणी देवी पर झंडे बहुत दूर दर्राज के क्षेत्रों से आते रहते है आगरा, भिण्ड, ग्वालियर, मैनपुरी, औरैया एवं अन्य आस-पास के क्षेत्र की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है यह सिद्धपीठ माँ ब्रह्माणी देवी मंदिर की जगह मंदिर स्वयं में ही बरमानी नाम से भी प्रसिद्ध है। मंदिर के गर्भग्रह का निर्माण बीसा यंत्र के साथ स्वयं आदि शिल्पी विश्वकर्मा जी ने द्वादश ग्रहों की स्थापना के साथ निर्मित किया था। स्थानीय बुजुर्ग लोगों के अनुसार मंदिर क्षेत्र के आस-पास नौ कुएँ भी स्थापित हैं ऐसी मान्यता है कि यमुना नदी के पार्श्व में बलरई के बीहड़ों के बीच स्थित यह मंदिर आदिकालीन शक्ति पूजा का स्मरण कराता है। मंदिर की स्थापना के संबंध में विभिन्न मत हैं।

प्रचलित कहानी के अनुसार: महाराजा भदावर माता ब्रह्माणी को म्यांमार देश से एक शर्त पर लेकर आये थे। शर्त ये थी जिस जगह तुमने पीछे मुड़कर देखा में वही रुक जाऊंगी इसी जगह पर आकर राजा को एक आवाज सुनाई दी तो राजा ने पीछे मुड़कर देखा तो माता की मूर्ती ने विशाल रूप धारण कर लिया, और शर्त के अनुसार मंदिर का निर्माण महाराजा भदावर ने करवाया था। भदावर के राजा द्वारा मंदिर की स्थापना लगभग सन् 1500 के आस-पास हुई थी। आज भी भदावर क्षेत्र का शाही परिवार माता को अपनी कुल देवी मानता है, तथा समय-समय पर पूजा अर्चना करने आता रहता है।

वर्तमान में, मंदिर प्रांगण के साथ भगवान शिव तथा श्री हनुमंत लाल का मंदिर भी स्थापित है। भक्त माता के दर्शन हेतु विभिन्न प्रकार से माँ की पूजा-अर्चना करते हैं। कई बार लेट-लेट कर, तो कई बार किलोमीटर दूर पैदल चलकर देवी माँ को प्रसन्न करते हैं। प्रचलित नाम: बरमानी, बरमानी मंदिर, माँ ब्रह्माणी देवी मंदिरमुख्य आकर्षण फिरोज़ाबाद, मैनपुरी और इटावा के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है