चाणक्य नहीं चाहते कोई क्षेत्रीय पार्टी बनाई सरकार, एक ही विचारधारा की पार्टी सरकार बनाने में लड़ती रही

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महाराष्ट्र – 24 अक्टूबर को आए चुनाव नतीजे मैं भाजपा को 105 शिवसेना को 56 सीट मिली यह दोनों पार्टियां ने साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा वहीं कांग्रेस को 44 एनसीपी को 54 आधार को 16 और निर्दलीय को 13 सीट मिली ऐसा मानते हैं भाजपा और शिवसेना दोनों पार्टियों की एक ही विचारधारा के मिलते जुलते हैं इस वजह से यह दोनों पार्टी महाराष्ट्र की जनता के बीच एक साथ होकर गए और जनता ने उस हिसाब से वोट दिया

अब जब सरकार बनने की बारी आई तो यह पार्टियां आपस में मुख्यमंत्री मेरा हो इस बात को लेकर आपस में लड़ रही हैं भाई भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी है और बड़ी पार्टी है भाजपा का साफ-साफ कहना है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस होंगे जो कि उनकी पार्टी के

रही बात सरकार को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जिन्हें उनकी पार्टी के लोग चाणक्य का दर्जा देते हैं वह भी मुख्यमंत्री मेरा हो की मांग को लेकर अड़े हैं शायद उनका मानना है कि अगर शिवसेना का मुख्यमंत्री हो गया तो महाराष्ट्र में शिवसेना का कद बढ़ जाएगा और भविष्य में कहीं ना कहीं हमें चुनौती देंगे चाणक्य नहीं चाहते कि कोई क्षेत्रीय पार्टी आगे बढ़ सके और उन्हें कंपटीशन दे अगर शिवसेना और कांग्रेस मिलकर सरकार बनाएं तो यह महाराष्ट्र की जनता के भरोसे के विपरीत होगा जिन लोगों ने कांग्रेसी या शिवसेना के विरोध में वोट डाला उनका कोई महत्व नहीं रहेगा

अभी भाजपा ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करते हुए मांग की और राष्ट्रपति शासन भी लग गया वही शिवसेना का कहना है कि सरकार बनाने के लिए उन्होंने राज्यपाल से और समय की मांग की थी जो कि उन्हें नहीं दिया गया भाजपा के मुकाबले में उन्हें आधा ही समय दिया गया इस बात को लेकर शिवसेना कोर्ट चली गई देखना यह है कि क्या भाजपा साम दाम दंड भेद करके सरकार बनाने में सफल रहेगी