दावा पूरा, दवा कम, परेशान मरीजों का निकल रहा दम

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सैफई: – मेडिकल यूनिवर्सिटी में कुलपति की तमाम कोशिशों के बाबजूद अव्यवस्थाओ का आलम बना हुआ है हालांकि कुलपति का दावा है। कि बहुत ही जल्दी बिगड़ी हुई व्यवस्थाओं को पूरी तरीके से दुरुस्त कर लिया जाएगा ।

ऐसा कहा जा रहा है कि कुलपति से नाराजगी के चलते यूनिवर्सिटी स्टाफ के कुछ तथाकथित संदिग्ध कर्मी यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली को बिगाड़ने में जुटे हुए हैं मेडिकल यूनिवर्सिटी में दवाओं का टोटा है। और मेडिकल यूनिवर्सिटी में सभी प्रकार की दवाइयां नहीं होने के कारण यहां आने वाले मरीजों को मजबूरन मेडिकल स्टोर से पैसे देकर दवाइयां लेनी पड़ रही हैं। चिकित्सकों की लिखी दवाओं में से मरीजों को एकाध ही अंदर से मिल पाती है।

मेडिकल यूनिवर्सिटी में लगभग 200 दवाइयां टेबलेट की संचालित हैं तथा 100 सीरप ओर 250 इंजेक्शन होते है। जिसमे ओपीडी में सीरप व टैबलेट्स वितरण की जाती है। लेकिन अभी मेडिकल यूनिवर्सिटी में सिर्फ 60 से 70 तरह की दवाई उपलब्ध है। आज की तारीख में ओपीडी में वितरित की जाने वाली दवाइयों में मुख्य रूप से गैस की दवा बिल्कुल खत्म हो चुकी है, बच्चों के सिरप,बुखार में दी जाने वाली दवाइयां एंटीबायोटिक,आंख के ड्रॉप जैसी दवाइयां बिल्कुल खत्म हो चुकी है। खबर सूत्रों से मिली है परचेस में बैठे कर्मचारियों द्वारा व कुछ उच्च कुर्सियों पर बैठे प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के चलते दवाइयों का टोटा है।

कल कुलपति द्वारा बैठक की गई थी जिसमें दो स्टाफ को कारण बताओ नोटिस भी दिया गया है। बातते चले ओपीडी में हर रोज 3 से 4 हजार मरीज आते थे इलाज के लिए। लेकिन दवाइयों का टूटा पड़ने पर ओपीडी में मरीजों की संख्या में आई गिरावट जहां दवा काउंटर पर लंबी लंबी लाइन लगती थी वहां पर सन्नाटा पसरा हुआ है।

बच्चे को देखने के बाद चिकित्सक ने पर्ची में 3-4 दवाइयां लिखीं। अस्पताल से दवाइयां लेने पहुंचा तो फार्मासिस्ट ने केवल शीशी देकर अन्य दवाइयां बाहर से लेने के लिए बोल दिया।. – विनोद कुमार

पहले पर्ची और बाद में चिकित्सक के केबिन के बाहर लंबी लाइन में लगने के बाद पांच से केवल एक दवाई ही मिली है। शेष दवाइयों को मजबूरन बाहर से खरीदना पड़ेगा।. – तेजपाल सिंह एटा

फिरोजाबाद से आया हूं। यहां चिकित्सकों को दिखाने के लिए बहुत देर तक लाइन लगा। जब दवा लेने के लिए खिड़की पर एक भी दवा नही मिली। बाहर से लेने को कह दिया। – भूपेंद्र कुमार

अस्पताल चिकित्सकों की पर्ची में लिखी सभी दवाइयां नहीं मिल रहीं है। इससे परेशानी हो रही है। पर्ची में लिखी चार में से दो दवाइएं ही अस्पताल में मिली है। बाकी बाहर से लेनी पड़ेंगी।. – रजनी इटावा से