बलरई/जसवंतनगर:-बलरई क्षेत्र के नगलातौर,जाखन, घुरा में इन दिनों किसान आवारा पशुओं से बहुत परेशान हैं। किसानों का कहना है कि आवारा पशु रात दिन खेतों में उनकी फसलों को बर्बाद करते हैं। कई बार तो टॉर्च लेकर उनके पीछे भागना पड़ता है। रामबाबू नाम के किसान ने बताया कि बाजरे की फसल बोई थी, लेकिन आवारा पशुओ ने उसे तहस नहस कर दिया हैं। किसानों का कहना है कि मोदी सरकार खेती में तकनीक के प्रयोग से आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन आय दोगुनी कैसे होगी? यदि फसल अच्छी हो भी जाए तो इन आवारा पशुओं का क्या करें। किसान को तो दोहरी मार सहनी पड़ती है। लोन लेकर खेती करता है, वहीं कभी मौसम और कभी अन्नापशु उसकी मेहनत पर पानी फेरने को उतारू हैं।

गांव के किसानों को अपनी फसल बचाने के लाले हैं। जहां गांवों में नील गाएं की समस्या पहले से थी, अब एक और समस्या इन किसानों को यहां के छुट्टा गाय और अन्ना जानवर अपनी फसलें उगाने में अड़चने डाल रहे हैं। हालात ये हैं कि रात-रात जागने के बावजूद उनके खेतों में खड़ी चना और सरसों की फसलो के खेतों को छुट्टा अन्ना जानवर खेल का मैदान समझकर सारी रात और दिन में अखाड़े करते हुए कुश्ती करते हैं। आए दिन नुकसान उठा रहे किसान इस बात से परेशान हैं कि आखिर इस समस्या का निदान क्या है।

अब तो गांव की सड़कों पर घूम रहे छुट्टा मवेशी बच्चों के लिये भी सरदर्द बनी हैं। बल्कि ग्राम के सीमावर्ती क्षेत्र में खेती किसानी कर रहे लोगों की भी समस्या है। इन मवेशियों को पकड़वाने के जिला प्रशासन ने कभी भी कोई प्रबंध नही किए। इस बारे ग्राम पंचायत द्वारा गौशाला कानिर्माण कराया गया लेकिन उसमें गाय रखने का अभियान भी फुस्स हो गया है।


रामबाबू, लवकिशोर, राजकिशोर, पुनीत, रामेन्द्र, अश्वनी, राजनारायण, बन्टू,डालचंद्र,कोमल, सिंह,मोहनलाल,डिप्टी सिंह आदि किसानों ने बताया कि इन छुट्टा जानवरों से अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों में ऊंची तार की बाड़ लगाई है। पर यह मवेशी इन तारों को भी पार कर जाते इस समय आलू और सरसों, चना की मुख्य फ़सल है जो बोई गई हैं जिनको ये अन्ना जानवर नुकसान पहुंचा रहे हैं मुख्यता अब एक सप्ताह बाद गेहूँ और जो की फसलो की बुबाई चालू हो जाएगी यदि यही हाल रहा तो गेहूँ और जो की फसलों को भी यही अन्ना जानवर वर्वाद कर देंगे।
किसानों की फसल की पैदावार अन्ना जानवरों के कारण कम हो गई है।

क्या बोले किसान

  • 1- सरकार तो गौवंश के संरक्षण के लिए तमाम उपाय कर रही है लेकिन प्रशासनिक अधिकारी व ग्राम सचिव ग्राम प्रधान पलीता लगा रहे है। और सरकारी खजाने से आये धन से अधिकारीगण बंदर बाँट कर रहे है – कोमल सिंह किसान
  • 2- गौवंश के रखरखाव में प्रशासन व ग्राम पंचायतें बिलकुल फेल साबित हो रही है ग्राम पंचायतों में गौशाला तो बनबा दी गई है लेकिन उनमें एक भी गौवंश मौजूद नहीं है कागजों में गौशाला बनी हुई है लेकिन धरातल पर गौशाला में गौवंश नहीं है इस पर सरकार को कड़े से कड़े फैसले लेने चाहिए जिससे प्रशासनिक अधिकारी सही ढंग से कार्य करें व सरकारी धन का दुरूपयोग होने से बचाया जा सके – डालचंद्र सिंह राजपूत किसान
  • 3 – किसान ने कहा गौवंश के कारण रात रात भर जग कर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। आवारा गौवंश के कारण फसल को भारी नुकसान हुआ है।- राजकिशोर
  • 4 – सरकार ने गौशाला के लिए पैसा तो ग्राम प्रधानों को दे दिया लेकिन गौशाला में एक भी गाय नहीं है सभी आवारा गौवंश खुले में घूम रहे है और हम किसानों को इसका नुकसान झेलना पड़ रहा है। – पुनीत कुमार