इस्तीफे की आड़ में राजा ने बचाया अपना वजीर, सैफई विश्वविद्यालय के ओएसडी का इस्तीफा सवालों के घेरे में, आखिरकार क्यों नहीं कुलपति ने ऑडियो की कराई जांच.

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सैफई। शतरंज के खेल में वजीर हमेशा अपने राजा को बचाता है लेकिन आज के युग मे राजा अपने वजीर को बचाने में जुट गये है,बात सैफई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर राजकुमार के राज्य की है जिन्होंने अपने वजीर ओएसडी जयशंकर प्रसाद को बिना जाँच करवाये इस्तीफा स्वीकार कर जल्दबाजी में उनकी विश्वविद्यालय से विदाई कर उनको घर मे आराम करने भेज दिया इसको क्या कहेंगे यह आप खुद समझ सकते है।।ओएसडी के पुत्र और पूर्व सफाई ठेके के फर्म मालिक सिराज चौधरी के बीच लाखो रुपयो के लेन देन की 13 मिनट की ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी होने के बाद राजकुमार राज्य की नींव भूकंप के आहट की तरह डगमगा गई,उससे पहले की 4 सदस्यी टीम जाँच शुरू करती दो दिन बाद ही कुलपति द्वारा अपने ओएसडी वजीर का इस्तीफा मंजूर कर लाया,और अपनी अनुपस्थिति में वजीर की बन्द कमरे में चंद लोगो के बीच विदाई का गुलदस्ता दिलवाकर तामपत्र थमा दिया गया,और राज शहनील के परदों के पीछे साये में दफन हो गया।जयशंकर भी कहते चले गये “दिल के अरमां आँसुयों में बह गये, हम वफा करके भी तन्हा रह गये।।।

ओएसडी वजीर के इस्तीफे के बाद कई राज हो गये दफन

UPRIMS

सितंबर 2018 से विश्वविद्यालय के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी का चार्ज ग्रहण करने वाले 65 वर्षीय जयशंकर प्रसाद कुलपति डॉक्टर राजकुमार के वजीर के रूप में जाने जाते थे,वित्तीय से लेकर प्रशासनिक शक्तियां उनके हाथ ने थमा दी गई थी,कोई भी सरकारी फाइल बिना जयशंकर प्रसाद के हस्ताक्षर और नोटिंग के बिना आगे नही बढ़ सकती थी,किसी भी कर्मचारी या अधिकारी का निलंबन हो या बहाली हर काम जयशंकर के बिना नही होता था। 2019 में भूतपूर्व सैनिक कल्याण के मार्फत संविदा पर नियुक्ति का मसौदा भी कुलपति और कुलसचिव द्वारा तैयार किया गया तब जाकर विश्वविद्यालय के राजा डॉक्टर राजकुमार ने ओएसडी नियुक्त कर जयशंकर प्रसाद को राज्य की बागडोर हाथो में सौंप दी,जयशंकर प्रसाद के दो साल से कम कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय में कई संविदा कर्मियों की नियुक्ति का मामला हो या फिर आयुष्मान मित्रो की नियुक्तियों का जयशंकर प्रसाद की मोहर के बिना कुछ सम्भव नही था,विश्वविद्यालय में हर वर्ष पर्चेस बिभाग में होने वाली करोड़ो रुपयों की खरीदारी की बागडोर बखूबी जयशंकर अपने हाथो संभालते थे।।।

ऑडियो रिकॉर्डिंग की जाँच से घबराये कुलपति

कुलपति

गोपनीय सूत्र बताते है कि ओएसडी के पुत्र और ठेकेदार के बीच 13 मिनट की ऑडियो महीने भर पहले ही विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर राजकुमार सहित कई अधिकारियों के पास मौजूद थी लेकिन किसी ने कोई इस मामले में तबज्जो नही दी जब यह ऑडियो एनडीटीवी के हाथ लगी और उसको सोशल मीडिया में जारी किया गया तब राज्य की सत्ता में हलचल मची लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह कि विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करती इस ऑडियो रिकॉर्डिंग की जाँच ना कराकर एफआईआर से अपने संविदाकर्मी वजीर को क्यों बचाया गया,जाँच शुरू होने से पहले इस्तीफा मंजूर करना क्या राजा अपने वजीर को इस मामले में सुरक्षित करने में कामयाब रहे,यह सवाल अभी गर्त में छुप गया है।।राजा जानते थे कि अगर ऑडियो प्रकरण की पुलिस या शासन द्वारा जाँच हो गयी तो शतरंज के कई पयादे वजीर के चक्कर मे पिट जाएंगे।।

विश्वविद्यालय द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्तता पाये जाने पर कठोर कार्यवाही- कुलपति

OSD

आज विश्वविद्यालय के कुलपति ने मीडिया को भेजे प्रेस नोट में कहा कि विश्वविद्यालय में किसी भी कर्मचारियों और अधिकारियों को भ्रष्टाचार में संलिप्त पाये जाने की शिकायत पर बख्सा नही जायेगा और उनके खिलाफ विधिक कार्यवाही की जायेगी ऑडियो वायरल से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई है जो निंदनीय है,2 साल 2 महीने के कार्यकाल में कुलपति ने ऐसे दो सौ प्रेस नोट मीडिया को जारी किये लेकिन आज तक किसी पर भी कार्यवाही नही की गई और दिन व दिन विश्वविद्यालय में भ्रस्टाचार की जड़े फैलती रही,शुरुआत में कुलपति यह भी कहते नजर आते थे कि जिस दिन मेने कार्यवाही करना शुरू कर दी तो शायद इस विश्वविद्यालय में ताला ना लग जाये तो फिर आखिर कुलपति डॉक्टर राजकुमार को किस बात का डर सता रहा है कार्यवाही करने में।।

कई जाँचें आज भी ठंडे बस्ते में आराम फरमाती

2016 की स्टॉफ नर्स भर्ती परीक्षा घोटाला,2015 लेब टेक्नीशियन घोटाला,सीपी नेट परीक्षा 2018, 2016-17 लेखा परीक्षा भर्ती,डेंटल बिभाग में लेक्चरर डॉक्टर गौरव जैन की नियुक्ति का मामला,डीएनएस जैसी पदोन्नति पोस्ट पर एनएस लवली जेम्स की नियुक्ति का मामला हो ऐसे ना जाने कितने मामले है जो कार्यवाही और जाँच के लिये वर्षो से उनकी फाइलें इस मेज से उस मेज घूम रही है,कुछ मामले जाँच होने के बाद भी ठंडे बस्ते में पड़े धूल फाँक रहे है और दोषी आराम से ऐशोआराम में जी रहे है।बिना जाँच कराये डॉक्टर सुनील श्रीवास्तव की बहाली का मामला हो या फिर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की बहाली का मामला हो सब जयशंकर की माया!!लेकिन निलंबित छोटे कर्मचारी आज भी बहाली के दिन गिन रहे है।