परिवार की एकता के लिए किसी भी तरह के समर्पण को तैयार: शिवपाल

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संवाद सहयोगी, सैफई: प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि परिवार की एकता कायम रहे इसके लिए वो अपनी तरफ से किसी भी तरह का समर्पण करने के लिए तैयार है ।
शिवपाल यादव नेता जी ने जन्मदिन पर आयोजित सैफई के मास्टर चंदगीराम स्टेडियम मे एक समारोह को संबोधित कर रहे थे । 

नेता जी के जन्मदिन पर जुटे लोगो का आवाहन करते हुए उन्हेाने कहा कि आप लोग चाहो तो वो राजनीत में कार्यकर्ता बनने के लिए तैयार है लेकिन हर हाल मे नेताजी की विचारधारा अपनानी होगी।
उन्होने कहा कि अगर देश में परिवर्तन लाना है तो त्याग और संघर्ष करना ही होगा । यह सब नेता जी ने किया है । उन्होने कहा कि नेताजी प्रधानमंत्री नहीं बन जाते लेकिन उनकी यह भूल समझो या गलती । उन्होंने कहा कि एक कहावत है अगर आप बिजनेस कर रहे हो और मुनीम को मालिक बना देगे तो भट्टा बैठेगा ही । कुछ ऐसा ही नेताजी ने भी किया । रक्षा मंत्री बने तीन बार मुख्यमंत्री बने यह भी सही है 2 बार तो मुख्यमंत्री बनाने में हमारा बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने कहा कि कभी-कभी तो अपने लोग भी धोखा देते हैं लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारना चाहिए।

उन्होने कहा कि हमारी पार्टी के समस्त लोगों ने बैठक की जिसमें यह निर्णय लिया गया था कि नेता जी का जन्मदिन एकता के रूप में मनाया जाए । जिसमें गरीब किसान बा हर जाति वर्ग के लोगों को एक एक किया जाए। जब एकता की बात आई तो प्रेस वालों ने कहा कि आपके घर के लोग एक होंगे । मैंने कहा हमेशा नेताजी की बात को माना है और कभी उनकी बात को टाला नहीं हम चाहते हैं परिवार एक रहे । हमने कभी नेताजी की बात नहीं गिराई । जिन लोगों ने गिराया है वह लोग आज भी बात नहीं मान रहे हैं । हम आज भी नेता जी की बात को मानने के लिए तैयार हैं हम यहां सभी बैठे बुजुर्ग लोगों से कहूंगा ।

उन्होने कहा कि प्रदेश में हर एक जनपद में घूमा हूॅ । हर जगह बुजुर्ग लोग मिले जो लोग समाजवादी विचारधारा से जुड़े थे उन सभी लोगों ने हमसे कहा कि अगर भतीजा बात नहीं मान रहा है तो आप ही झुक जाओ ।
लखनऊ के एक वाक्ये का जिक्र करते हुए उन्होने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना है अगर मुझे मुख्यमंत्री बनना होता तो 2003 में ही मुख्यमंत्री बन जाता और हम नेता जी से बोल दे दे तो नेताजी हमें ही मुख्यमंत्री बनाते लेकिन मुझे नहीं बनना था ।
उन्होने कहा कि हम फिरोजाबाद का चुनाव नहीं लड़ते हम प्रोफेसर के यहाॅ गए थे । हम ने यह कहा कि मुझे कुछ नहीं चाहिए सब लोग एक रहें लेकिन जब बात नहीं बनी तो उनकी ओर से अखबारो में बयान दिया था कि ऐसी पार्टियां तो हमने बहुत बनती देखी हैं। जिनको 500 वोट नहीं मिलेंगे । पूर्वांचल में जाएंगे तो पीटे जाएंगे इसलिए हमने फिरोजाबाद से चुनाव लड़ा था । 

प्रो. रामगोपाल की ओर इशारा करते हुए उन्होने कहा कि उनकी तरफ केंद्र सरकार का हाथ था मेरे पास तो पैसा नहीं था उसके बावजूद भी मुझे परिवार की बात माननी पड़ी । मुझे वोट कब मिला और भाजपा में चला गया । बस मैं यह कहना चाहता हूं मैं तो नेताजी की बात आज भी मानने को तैयार हूॅ । पंच चुन लेना समस्त बुजुर्ग बैठ जाएं । हम बात मानने को तैयार हैं । इसलिए हम चाहते हैं समाजवादी विचारधारा के लोग एक साथ होकर लोहिया जी के बताए रास्ते पर चलें।
उन्होने कहा कि हमने त्याग किया है बड़े बुजुर्गों की बातें मानकर मुख्यमंत्री पद का हम नहीं बनेंगे । उन्होंने परिवार की हारी हुई सभी सीटें के बारे में जिक्र किया । अगर परिवार में माहौल खराब नहीं होता तो एक भी सीट नहीं हारते । 

उन्होंने कहा कि आज अधिकारियों के भरोसे सरकार चल रही है अगर अधिकारियों के भरोसे सरकार चलेगी तो कैसे कार्य होगा । प्रदेश में अधिकारी जनता को परेशान कर रहे हैं । सुन नहीं रहे हैं कोई जनता की बात अधिकारियों को कोई डांटने वाला नहीं है अभी एक मंत्री ने अधिकारी को फोन कर दिया था तो मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा होता वो तो भला हो इस्तीफा देने से बच गई ।

उन्होने कहा कि अधिकारियों के दिमाग खराब है विधायकों को समझते ही नहीं कुछ जबकि मंत्री व विधायक का प्रोटोकाल बहुत ऊंचा होता है । जिस दिन हमें विधायक नहीं समझेंगे अधिकारी उस दिन अधिकारियो को समझ मे आ जाएगा । उन्होने कहा कि हमारी सरकार के समय में भी एक मंत्री पर इस तरह की समस्या आ गई थी उस समय हमने उस मंत्री की मदद की थी लेकिन आज वह मंत्री भी जरूरत पड़ी तो साथ छोड़ गया। आपने बहुत लोगों का भला किया लेकिन लोग लालची हो गए साथ छोड़ गए ।